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बुध वक्री 2018

बुध वक्री 2018

बुध ग्रह के वक्री होने पर अक्सर लोगों के मन में एक गलत धारणा रहती है कि, यदि बुध वक्री हुआ तो जीवन में संघर्ष और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वास्तव में यह धारणा सही नहीं है। क्योंकि यह आवश्यक नहीं है कि कोई भी ग्रह जब वक्री होता है तो जीवन में परेशानियां उत्पन्न करता है। इसके विपरीत कुछ ग्रहों के वक्री होने के प्रभाव से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।

दरअसल ग्रहों के वक्री होने के बारे में कुछ गलत अर्थ निकाल लिये जाते हैं। किसी ग्रह का वक्री होना उसके उल्टा या पीछे चलने से नहीं है यानि जब कोई ग्रह वक्री होता है तो वह विपरीत दिशा में गमन नहीं करता है। क्योंकि कोई भी ग्रह अपने परिभ्रमण पथ पर कभी उल्टा या पीछे की ओर नहीं चलता है। सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर सभी ग्रह अपनी कक्षा में एक निश्चित गति से घूमते हैं। जब कोई ग्रह अपनी तेज गति से किसी अन्य ग्रह को पीछे छोड़ देता है तो उसे अतिचारी कहा जाता है। वहीं जब कोई ग्रह अपनी धीमी गति के कारण पीछे की ओर खिसकता हुआ प्रतीत होता है तो उसे वक्री कहते हैं। इसके बाद जब वह पुन: आगे बढ़ते हुआ दिखाई देता है तो उसे मार्गी कहा जाता है।

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सूर्य के सबसे समीप होने की वजह से बुध ग्रह बहुत कम समय में वक्री, मार्गी और अतिगामी होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह के वक्री होने पर अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम देखने को मिलते हैं। हालांकि इसका निर्धारण अन्य ग्रहों के साथ बुध के संबंध और विभिन्न भावों में उसकी स्थिति के आधार पर होता है। ज्योतिष में बुध को एक शुभ ग्रह माना गया है लेकिन अशुभ अथवा क्रूर ग्रहों के संपर्क में आने पर यह अशुभ प्रभाव देने लगता है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, संचार और चेतना का कारक कहा जाता है। बुध ग्रह वक्री होने पर जातक की बुद्धि, वाणी और संवाद कौशल को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में जातक के स्वभाव में परिवर्तन देखने को मिलता है। इसके फलस्वरुप विचारों में भिन्नता आने लगती है। इसके अलावा बुध के वक्री होने से जातक के विचारों में परिवर्तन और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है।

पढ़ें: बुध ग्रह की शांति के उपाय

वर्ष 2018 में बुध के वक्री होने का समय और तारीख

बुध ग्रह एक वर्ष में सामान्यत: 3 से 4 बार वक्री होता है। नीचे दी गई तालिका में पढ़ें वर्ष 2018 में बुध वक्री होने की तारीखें और समय।

बुध वक्री 2018
दिनांक समय समाप्ति दिनांक समय
23 मार्च 2018 (शुक्रवार) 5:49 15 अप्रैल 2018 (रविवार) 14:50 बजे
26 जुलाई 2018 (गुरुवार) 10:32 19 अगस्त 2018 (रविवार) 9:55 बजे
17 नवंबर 2018 (शनिवार) 7:04 7 दिसंबर 2018 (शुक्रवार) 02:52 बजे

पढ़ें: वार्षिक राशिफल 2018 और जानें इस साल क्या कहते हैं आपके सितारे?

वक्री बुध का महत्व

बुध ग्रह बुद्धि, संवाद, संचार, बौद्धिक कौशल, निर्णय लेने की क्षमता, लेखन, व्यापार और सांख्यिकी का कारक होता है। जब भी कोई ग्रह वक्री होता है तो उसके चेष्टा बल में वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति का सामर्थ्य बढ़ता है और वह अधिक परिश्रम करता है। किसी राशि में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाला बुध, वक्री होने की स्थिति में और अधिक तीव्रता से उत्तम फल प्रदान करता है। वहीं किसी राशि में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाला बुध, वक्री होने की स्थिति में कुछ बुरे परिणाम दे सकता है। यदि कुंडली में बुध अत्यंत उच्च स्थिति में हो तो वक्री बुध लाभ भी देता है। इस ग्रह योग वालों को अचानक कहीं से धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

  1. वक्री बुध का व्यापार पर असर

बुध ग्रह व्यापार का कारक होता है, इसलिए बुध के वक्री, मार्गी और अस्त होने से कारोबार पर भी असर पड़ना स्वभाविक है। वैदिक ज्योतिष में शक्तिशाली बुध व्यापार में सफलता प्रदान करता है। वहीं निर्बल और वक्री होने पर बुध व्यापार में मंदी और अर्थव्यवस्था में गिरावट को दर्शाता है।

  1. बुद्धि और विवेक में वृद्धि

बुद्धि और विवेक का कारक कहे जाने वाले बुध के जन्मकुंडली में वक्री होने से कई तरह की शक्तियां प्राप्त हो सकती हैं। बुध की वक्री अवधि में व्यक्ति दूरदृष्टा और मनोवैज्ञानिक विषयों में निपुणता प्राप्त करता है। कहते हैं कि जन्म के समय जिन लोगों की कुंडली में बुध वक्री होता है, वे लोग संकेत और कूट रचना की भाषा समझने में निपुण होते हैं। इसके अतिरिक्त वे ज्योतिषी या भविष्यवक्ता भी बन सकते हैं।

यह भी पढ़ें: कुंडली के प्रत्येक भाव में बुध ग्रह का प्रभाव

वक्री बुध के प्रभाव

बुध के वक्री होने का सबसे अधिक प्रभाव मनुष्य के व्यवहार और स्वभाव पर पड़ता है। इसके फलस्वरुप व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं। वक्री बुध व्यक्ति की बातचीत करने की कला और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर देता है। बुध के वक्री होने के प्रभाव से व्यक्ति जीवन में कुछ अप्रत्याशित और हैरान कर देने वाले निर्णय लेने लगता है। ये फैसले परिस्थितियों के एकदम विपरीत भी हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरुप निर्णय लेने के बाद व्यक्ति पछतावा करने लगता है।

  1. यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के प्रथम भाव में बुध वक्री होता है, तो वह व्यक्ति तेज गति से कार्य करता है, लेकिन कभी-कभी यही जल्दबाजी उसके लिए हानिकारक साबित होती है। क्योंकि ये लोग बिना विचार किये निर्णय लेते हैं और फिर नुकसान उठाते हैं।
  2. वहीं अगर जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में बुध वक्री होता है, तो वह व्यक्ति अपने बौद्धिक कौशल से बहुत धन अर्जित करता है। इसके अलावा यदि वक्री बुध की दृष्टि अष्टम भाव पर हो तो, व्यक्ति धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रवृत्ति का बनता है। वहीं तीसरे भाव में वक्री बुध व्यक्ति को साहसी बनाता है।
  3. कुंडली के चतुर्थ भाव में बुध के वक्री होने पर व्यक्ति राजशाही जीवन व्यतीत करता है। पंचम भाव में वक्री बुध वाले व्यक्ति की कन्या संतानें अधिक होती हैं और इन्हीं कन्याओं की वजह से इन लोगों को सम्मान की प्राप्ति होती है।
  4. षष्ठम भाव में बुध के वक्री होने से व्यक्ति के मन में निराशा का भाव आता है और स्वभाव में झुंझुलाहट रहती है। वहीं सप्तम भाव में बुध के वक्री होने से सुंदर जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
  5. अष्टम भाव में बुध के वक्री होने से व्यक्ति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है। ये परिश्रम की बदौलत मान और सम्मान अर्जित करते हैं। नवम भाव का वक्री बुध व्यक्ति को शास्त्रों में प्रवीण, सफल डॉक्टर, वैद्य, वैज्ञानिक बनाता है।
  6. दशम भाव में वक्री बुध वाले जातक को पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है। यह राजनेता एवं असाधारण व्यक्तित्व का धनी होता है। वहीं एकादश स्थान का वक्री बुध व्यक्ति को धनवान, दीर्घायु और सुखी बनाता है। द्वादश भाव का वक्री बुध शत्रुओं को पराजित करने वाला होता है और धार्मिक प्रवृत्ति को देने वाला होता है।

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बुध के वक्री होने पर क्या ना करें?

बुध का संबंध बौद्धिक क्षमता, विचार, निर्णय लेने की क्षमता, लेखन, व्यापार आदि से होता है। इसलिए बुध जब वक्री हो तो व्यक्ति को शांति से काम लेना चाहिए। इस दौरान अति उत्साह में आकर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। क्योंकि वक्री बुध अक्सर गलत निर्णय करवा बैठता है। इसलिए जो काम जैसा चल रहा होता है, उसे चलने देना चाहिए।

बुध के वक्री होने पर कोई नया कार्य प्रारंभ ना करें। कॉन्ट्रेक्ट या ठेकेदारी में नए कार्य हाथ में ना लें, वरना हानि उठानी पड़ सकती है। किसी करार पर हस्ताक्षर करना और अधिकतर उन मामलों में जहां पर लंबी अवधि के लिये चलने वाले कार्यों के लिये एग्रीमेंट बिल्कुल सफ़ल नही हो सकते हैं। साधारण मामले जो लगातार परेशानी उत्पन्न कर रहे होते हैं,उनके समाधान के लिये यह समय अच्छा माना जाता है।

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