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ग्रहण 2021: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण

ग्रहण 2021 (grahan 2021) के इस पेज में हम एस्ट्रोसेज के सभी पाठकों को इस साल होने वाले सभी ग्रहणों की जरूरी जानकारी देंगे, जो दो ग्रहों के बीच में किसी भी अन्य ग्रह या पिंड के आने के बाद घटित होता है। इस स्थिति में ज्यादातर सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का निर्माण होता है।

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ग्रहण 2021

इस लेख में आपको हम वर्ष 2021 में होने वाले सभी सूर्य ग्रहण 2021 और चंद्र ग्रहण 2021 की सूचियों के अलावा, आपको यहां बहुत सारी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी देंगे। इसके साथ ही हम न केवल 2021 में ग्रहण की तारीख, समय, अवधि और दृश्यता पर चर्चा करेंगे, बल्कि इस खगोलीय घटना के ज्योतिषीय और धार्मिक पहलुओं को भी विस्तार से समझेंगे, जिसकी मदद से आप जान सकेंगे कि आखिर वो क्या उपाय हैं, जिन्हें करके आप किसी भी प्रकार के ग्रहण दोष से खुद के साथ-साथ अपने परिवार का भी बचाव कर सकते हैं और हर ग्रहण के सूतक काल के दौरान आपको कौन-कौन सी विशेष सावधानियां बरतनी चाहिएं, ये भी हम आपको ग्रहण 2021 के अपने इसी लेख में विस्तार पूर्वक बताएंगे।

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साल 2021 में घटित होने वाले सभी ग्रहण

वर्ष 2021 में घटित होने वाले सभी सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की बात करें तो इस वर्ष 2 सूर्य ग्रहण और 2 ही चंद्र ग्रहण घटित होंगे। हालांकि इन सभी ग्रहणों में से जहाँ कुछ ग्रहण भारत में दृश्य होंगे तो वहीं, कुछ भारत में नहीं देखें जाएंगे। ऐसे में जहाँ इनकी दृश्यता नहीं होगी, वहां इनका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा लेकिन जहाँ इनकी दृश्यता होगी, वहां ग्रहण का प्रभाव हर प्राणी के ऊपर किसी न किसी रूप से ज़रूर ही पड़ने वाला है। वर्ष 2021 में घटित होने वाले सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बारे में आपको बताने से पहले आपका ये जानना बेहद ज़रूरी है कि, सूर्य और चंद्र ग्रहण किस घटना को कहते हैं और उनके प्रकार क्या है:-

  1. सूर्य ग्रहण 2021 (Surya Grahan 2021)

सूर्य ग्रहण उस घटना को कहते है, जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच से होते हुए गुजरता है। जब सूर्य ग्रहण पृथ्वी से देखा जाता है तो ये एक अद्भुत नज़ारा होता है जिसमें सूर्य को पूर्ण अथवा आंशिक रूप से आच्छादित होता हुआ प्रतीत होता है।

विज्ञान में इस घटना का ऐसा वर्णन किया गया है कि, जिस प्रकार पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और पृथ्वी की परिक्रमा ठीक उसी प्रकार चंद्र करता है। ऐसे में अक्सर परिक्रमा चक्र पूरा करते हुए, ऐसी स्थिति बन जाती है जब चंद्र परिक्रमा करते हुए सूर्य और पृथ्वी के बिल्कुल बीच में आ जाता है। इस दौरान चंद्र सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से अपने पीछे ढ़कते हुए उसे पृथ्वी तक पहुँचने से रोक लेता है और उस समय रोशनी के अभाव में पृथ्वी पर एक अजब सा अंधियारा छा जाता है। इस घटना को ही विज्ञान की भाषा में सूर्य ग्रहण (solar eclipse) कहते हैं, जोकि अमावस्या को ही घटित होती है, क्योंकि इस दौरान धरती से चन्द्रमा दिखाई नहीं देता है।

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सूर्य ग्रहण के प्रकार

आमतौर से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार से लगता है:-

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण: ये उस स्थिति में घटित होता है, जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्र आकर सूर्य की रोशनी को अपने पीछे पूर्ण रुप से ढक लेता है। इस घटना को ही पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं।
  • आंशिक सूर्य ग्रहण: इस ग्रहण की स्थिति में चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आकर सूर्य को अपने पीछे आंशिक रुप से ढक लेता है। इस दौरान सूर्य का पूरा प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुँचता और इस स्थिति को ही आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।
  • वलयाकार सूर्य ग्रहण: सूर्य ग्रहण की इस स्थिति में चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह न ढकते हुए, उसके केवल मध्य भाग को ढकता है। इस दौरान पृथ्वी से देखने पर सूर्य एक रिंग की तरह प्रतीत होता है, जिसे हम वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

  1. चंद्र ग्रहण 2021 (Chandra Grahan 2021)

सूर्य ग्रहण की तरह ही चंद्र ग्रहण भी उस खगोलीय घटना को कहते है, जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही होती है और चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा, ऐसे में इसी दौरान चन्द्रमा परिक्रमा करते हुए पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। इस स्थिति में तीनों सूर्य, पृथ्वी और चंद्र एक सीधी रेखा में मौजूद होते हैं। इस अनोखी घटना को ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है, जो सदा सर्वदा पूर्णिमा को ही घटित होती है।

चंद्र ग्रहण के प्रकार

ठीक सूर्य ग्रहण की तरह ही चंद्र ग्रहण भी मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:-

  • पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब सूर्य की परिक्रमा करते हुए उसके ठीक आगे पृथ्वी आ जाती है और उसी समय पृथ्वी के आगे चन्द्रमा आ जाता है। इस दौरान पृथ्वी सूर्य को पूर्णत: ढक लेती है, जिससे सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा तक नहीं पहुंच पाता और इसी स्थिति को पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं।
  • आंशिक चंद्र ग्रहण: इस स्थिति में पृथ्वी चन्द्रमा को आंशिक रुप से ढक लेती है, जिसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं।
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण: जब चंद्र पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए उसके पेनुम्ब्रा से होकर गुजरता है, जिससे चन्द्रमा पर सूर्य का प्रकाश कुछ कटा हुआ सा पहुँचता है। इस स्थिति में चन्द्रमा की सतह कुछ धुँधली दिखाई देने लगती है जिसे हम उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं। वास्तव में यह ग्रहण नहीं होता क्योंकि इसमें चंद्रमा ग्रसित नहीं होता। इसी वजह से इसका सूतक भी मान्य नहीं होता।

आमतौर पर हर ग्रहण का प्रकार एवं उस ग्रहण की अवधि केवल और केवल चन्द्रमा की स्थिति पर ही निर्भर करती है। तो आइये अब जानते हैं इस साल घटित होने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहणों के बारे में विस्तार से:-

  • सूर्य ग्रहण 2021 (Surya Grahan 2021)

ग्रहण 2021 की बात करें तो वर्ष 2021 में कुल दो सूर्य ग्रहण घटित होने वाले हैं। इनमें से पहला सूर्य ग्रहण वर्ष के मध्य में, यानि 10 जून 2021 को घटित होगा तो वहीं साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर 2021 को घटित होगा।

पहला सूर्य ग्रहण 2021
दिनांक सूर्य ग्रहण प्रारंभ सूर्य ग्रहण समाप्त दृश्य क्षेत्र
10 जून 13:42 बजे से 18:41 बजे तक उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग, यूरोप और एशिया में आंशिक व उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रुस में पूर्ण

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य नहीं होगा।

ग्रहण 2021 के अंतर्गत वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण साल के मध्य में 10 जून 2021 को लगेगा, जो एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण उस घटना को कहते हैं, जब चंद्र पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए, सामान्य की तुलना में उससे दूर हो जाता है। इस दौरान चंद्र सूर्य और पृथ्वी के बीच होता है, लेकिन उसका आकार पृथ्वी से देखने पर इतना नज़र नहीं आता कि वह पूरी तरह सूर्य की रोशनी को ढक सके। इस स्थिति में चंद्र के बाहरी किनारे पर सूर्य काफ़ी चमकदार रूप से रिंग यानि एक अंगूठी की तरह प्रतीत होता है। इस घटना को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस ग्रहण का समय गुरूवार की दोपहर 10 जून, को 13:42 बजे से बजे से शाम 18:41 बजे तक होगा।

साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण भारत में न दिखाई देते हुए केवल उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में, यूरोप और एशिया में, उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रुस में भी देखा जाएगा।

चूँकि भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता न तो पूर्ण रुप से और ना ही आंशिक रुप से होगी, इसलिए इसका सूतक भी भारत में प्रभावी नहीं होगा।

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दूसरा सूर्य ग्रहण 2021
दिनांक सूर्य ग्रहण प्रारंभ सूर्य ग्रहण समाप्त दृश्य क्षेत्र
4 दिसंबर 10:59 बजे से 15:07 बजे तक अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, अटलांटिक के दक्षिणी भाग, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। इस कारण ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य नहीं होगा।

वर्ष 2021 का दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण शनिवार, 4 दिसंबर 2021 को घटित होगा, जो एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है जब चंद्र, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आकर सूर्य को ढक लेता है जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाता है।

ये दूसरा सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, अटलांटिक के दक्षिणी भाग, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में ही नज़र आएगा।

चूँकि भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता बिलकुल शून्य होगी, इसलिए भारत में इसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा।

  • चंद्र ग्रहण 2021

ग्रहण 2021 के अंतर्गत सूर्य ग्रहण की तरह ही वर्ष 2021 में दो ही चंद्र ग्रहण घटित होने वाले हैं जिनमे से पहला चंद्र ग्रहण वर्ष के मध्य में 26 मई को घटित होगा तो वहीं साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर 2021 को घटित होगा।

पहला चंद्र ग्रहण 2021
दिनांक चंद्र ग्रहण प्रारंभ चंद्र ग्रहण समाप्त ग्रहण का प्रकार दृश्य क्षेत्र
26 मई 14:17 बजे से 19:19 बजे तक पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। इस कारण ये चंद्र ग्रहण भारत में तो दिखाई देगा, लेकिन यहाँ ये चंद्र ग्रहण केवल उप छाया ग्रहण की तरह दृश्य होगा, इसलिए भारत में इस चंद्र ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य नहीं होगा।

ग्रहण 2021 का पहला चंद्र ग्रहण साल के मध्य में 26 मई 2021, बुधवार को लगेगा। हिन्दू पंचांग अनुसार, इस ग्रहण का समय दोपहर 14:17 बजे से रात 19:19 बजे तक होगा।

ये चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में पूर्ण चंद्र ग्रहण की तरह दृश्य होगा, लेकिन भारत में ये महज एक उपच्छाया ग्रहण की तरह ही देखा जाएगा। जिस कारण भारत में इसका सूतक नहीं लगेगा।

दूसरा चंद्र ग्रहण 2021
दिनांक चंद्र ग्रहण प्रारंभ चंद्र ग्रहण समाप्त ग्रहण का प्रकार दृश्य क्षेत्र
19 नवंबर 11:32 बजे से 17:33 बजे तक आंशिक भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर के कुछ क्षेत्र

सूचना: उपरोक्त तालिका में दिया गया समय भारतीय समयानुसार है। इस कारण ये चंद्र ग्रहण भारत में यूँ तो दिखाई देगा, लेकिन उपचाया ग्रहण के रूप में दृश्य होने के चलते, इस चंद्र ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक यहाँ मान्य नहीं होगा।

वर्ष 2021 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 19 नवंबर, 2021 को घटित होने वाला है। जो शुक्रवार की दोपहर, 11:32 बजे से रात्रि 17:33 बजे तक रहेगा।

ये एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसकी दृश्यता भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर क्षेत्र में होगी।

चूँकि भारत में यह चंद्र ग्रहण उपच्छाया ग्रहण के रूप में दिखाई देगा, इसलिए यहाँ इसका सूतक प्रभावी नहीं होगा।

ग्रहण का सूतक काल और उसकी गणना

सूतक काल वो अशुभ समय होता है, जब सूर्य और चंद्र ग्रहण घटित होने के दौरान हर व्यक्ति को किसी भी तरह के शुभ व मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करना चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य संपन्न करता है तो, उसे शुभ फलों की जगह बेहद ही अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। हालांकि शास्त्रों में ही इस सूतक काल के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए कुछ ऐसे उपाय भी बताए गये हैं, जिन्हें यदि व्यक्ति ग्रहण काल के दौरान अपनाता है तो वो खुद के साथ-साथ अपने परिवार को भी ग्रहण के अशुभ प्रभावों से बचा सकता है। आइये अब जानते हैं कि आखिर कैसे की जाती है सूतक काल के समय की गणना जिससे आपको ग्रहण 2021 के सूतक काल का पता चल सके।

जैसा हमने पहले ही बताया कि ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण के सूतक के दौरान हर प्रकार के शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। ऐसे में ये जानना बेहद आवश्यक है कि आखिर किसी भी ग्रहण का सूतक काल कब तक प्रभावी रहता है। सूतक काल की गणना के लिए सबसे पहले घटित होने वाले सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का समय ज्ञात करना ज़रूरी होता है। ऐसे में जब आपको पता चलेगा कि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण कितने बजे से कितने बजे तक घटित होने वाला है तो सूतक काल की गणना आप बेहद आसानी से कर सकते हैं।

माना जाता है कि सूर्य ग्रहण घटित होने से ठीक 12 घंटे पहले से उस सूर्य ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाता है, जो सूर्य ग्रहण के समाप्त होने के बाद समाप्त हो जाता है। वहीं चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रहण शुरु होने से ठीक 9 घंटे पहले, उस चंद्र ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होने के साथ ही सूतक काल का भी अंत होता है। चलिए अब जानते हैं कि आखिर सूतक काल के दौरान किन विशेष कार्यों को करना वर्जित माना जाता है:-

ग्रहण 2021 के सूतक काल के दौरान ज़रूर करें ये काम

  • ग्रहण के सूतक काल के दौरान कम बोलें और संभव हो तो केवल मन ही मन भगवान का स्मरण करें।
  • सूतक काल के दौरान ग्रहण संबंधित ग्रह की शांति के लिए पूजा और पाठ करें।
  • सूतक काल के समय योग और ध्यान करें क्योंकि ऐसा करने से न केवल आपकी मानसिक शक्ति का विकास होगा बल्कि आप अपने शरीर को ग्रहण के हर प्रकार के दुष्प्रभावों से भी बचाने में सफल होंगे।
  • सूतक काल लगने के दौरान खाना न पकाएँ और पहले से बने खाने में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दें।
  • सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य मंत्र एवं चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र मंत्र का सपरिवार जाप करें।
  • पूजा के दौरान केवल और केवल मिट्टी के दियों का ही इस्तेमाल करें।
  • सूतक काल समाप्त होने पर स्नान कर पुनः पूजा करें।
  • ग्रहण समाप्ति पर घर और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें।

सूतक काल के दौरान भूल से भी न करें ये काम:

  • सूतक काल से ग्रहण के अंत तक किसी भी कार्यों को संपन्न नहीं करना चाहिए।
  • इस समय मन को शुद्ध रखें और मन में काम वासना जैसे विकार न आने दें।
  • यात्रा करने से बचें और मुमकिन हो तो इस समय घर से ही न निकलें।
  • किसी भी धारदार वस्तु जैसे: कैसी, सुई, चाक़ू, आदि का इस्तेमाल न करें।
  • भोजन करने और पकाने से बचें।
  • पूजा के दौरान देवी-देवता की प्रतिमा या मूर्ति का स्पर्श न करें।
  • अपने निजी कार्य जैसे: बालों में कंघी करना, दाँत सफाई करना, कपड़े धोना, आदि करने से बचें।
  • सूतक काल के समय सोने से भी परहेज करना चाहिए।

ग्रहण 2021 के सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को ज़रूर बरतनी चाहिए ये सावधानियाँ

  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की समाप्ति तक, किसी भी कारणवश अपने घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।
  • इस दौरान गर्भवती महिलाओं को नुकीली धातु जैसे: चाकू, छुरी, सुई या अन्य धारदार चीज़ों का बिलकुल भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे उसके होने वाले शिशु के अंगों को क्षति पहुँच सकती है।
  • भूल से भी सिलाई या कढ़ाई जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
  • किसी भी तरह के आभूषण सूतक काल के दौरान न पहनें।
  • ग्रहण की समाप्ति तक सोने और खाने से बचें।
  • संभव हो तो सूतक काल के समय दूर्वा घास को लेकर संतान गोपाल मंत्र का जप करें।

ग्रहण 2021 के सूतक के समय प्रयोग किये जाने वाले मंत्र

शास्त्रों अनुसार व्यक्ति को ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए उस ग्रहण से संबंधित ग्रहों के निम्नलिखित मंत्रों का जप करना चाहिए:-

सूर्य ग्रहण में इस मंत्र का करें जाप चंद्र ग्रहण में इस मंत्र का करें जाप
"ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नोः सूर्य: प्रचोदयात" “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नोः चन्द्रः प्रचोदयात्”

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ग्रहण का पौराणिक महत्व

सूर्य और चंद्र ग्रहण से जुड़ी यूँ तो कई पौराणिक मान्यताएँ प्रचलित हैं, लेकिन उनमें से राहु-केतु की कथा बेहद प्रसिद्ध है। उसी पौराणिक कथा के अनुसार, ये माना जाता है कि अमृत मंथन के समय की अपनी शत्रुता के कारण सूर्य और चन्द्रमा को छाया ग्रह राहु और केतु हर वर्ष ग्रहण लगाते हैं।

इस शत्रुता ने उस समय जन्म लिया था, जब समुद्र मंथन के बाद समुद्र से 14 रत्न निकले, जिसमें से एक था अमृत, जिसे पीकर हर देव और असुर अमर होना चाहते थे। फिर शुरू हुई अमृत पान की जंग। ऐसे में यदि कोई भी असुर उस अमृत का सेवन कर लेता तो, वो पूरे संसार के लिए घातक हो सकता है। इसी बात को समझते हुए भगवान विष्णु ने एक योजना बनाई और उसी योजना के अनुसार, उन्होंने असुरों को अमृत पान करने से रोकने के लिए स्वयं अप्सरा मोहिनी रुप धारण कर सभी असुरों को अपने वश में कर लिया।

इस दौरान अमृत दोनों पक्षों में बराबरी से बांटा गया, जिसमें भगवान विष्णु ने छल करते हुए, देवताओं को अमृत और असुरों को सामान्य जल पान कराना शुरू किया। लेकिन इससे पहले सभी असुर भगवान विष्णु की चाल में फँसते, वहां मौजूद स्वरभाऩु नामक एक असुर भगवान विष्णु की योजना समझ गया और वो अमृत पान करने के लिए देवताओं का रुप धारण कर देवताओं की कतार में लग गया।

जब मोहिनी रूप में भगवान विष्णु, देवता रूपी स्वरभानु असुर को अमृत पान करवाने आए तो, सबसे पहले सूर्य और चंद्र देव ने उन्हें पहचान लिया और भगवान विष्णु को सचेत कर दिया। हालांकि तब तक अमृत की कुछ बूंदें स्वरभानु पी चुका था। असुर की इस चालाकी से क्रोधित होकर विष्णु भगवान ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे असुर स्वरभानु का सिर उसके धड़ से अलग हो गया। चूँकि स्वरभानु अमृत की कुछ बूंद पीने में सफल रहा था, इसलिए वो मरा नहीं और उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया।

सूर्य और चंद्र देव ने ही राहु-केतु (स्वरभानु) को सबके सामने बेपर्दा किया था, इसलिए माना जाता है कि, राहु और केतु ही अपनी शत्रुता के चलते हर वर्ष सूर्य और चन्द्रमा पर ग्रहण लगाते हैं।

हमें उम्मीद है कि वर्ष 2021 के ग्रहण से संबंधित ये लेख आपको पसंद आया होगा। इस लेख को पसंद करने एवं पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद !

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