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तुला का मासिक राशिफल / Tula Masik Rashifal in Hindi

September, 2021
सामान्य
सितंबर का महीना आपके लिए एक औसत महीना रहने वाला है। न बहुत ज्यादा उमंग न कोई बड़ी परेशानी। मिला-जुलाकर ठीक ठाक समय रहेगा। करियर और कामकाज की बात करें तो समय ठीक है। आय के स्रोत बने रहेंगे। व्यापार/कारोबार सुचारू रूप से चलेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अच्छा है। पठन-पाठन के दृष्टिकोण से बात करें तो समय कुल मिलाकर अनुकूल रहेगा। घर-परिवार में वैसे तो सब अच्छा रहने की उम्मीद है, लेकिन बाहरी लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है। घर में फूट डालने की कोशिश आपके शत्रु करेंगे। सामंजस्य बनाए रखें तो कोई गलतफहमी पैदा नहीं हो सकती। धन-धान्य सुलभ रहेगा।
आमदनी होती रहेगी, लेकिन दिखावे की चीजों पर आपका खर्च भी बढ़ सकता है। विलासिता की चीजों पर खर्च करने की प्रवृत्ति रहेगी। प्रेम संबंधों के लिए समय थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। आपको अपने बुद्धि-विवेक से काम लेना है और संबंधों में मिठास बनाए रखने के अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। दाम्पत्य जीवन भी सहज रहेगा। सेहत आदि को लेकर भी कोई ऐसी बड़ी चिंता-परेशानी की बात नहीं दिखती।
कार्यक्षेत्र
करियर और कामकाज के दृष्टिकोण से सितंबर का महीना आपके लिए कुल मिलाकर अनुकूल ही रहने वाला है। चतुर्थ भाव में बैठे शनि की पूरे महीने दशम भाव पर सीधी दृष्टि रहेगी। यह नौकरीपेशा लोगों के लिए परिश्रम से अच्छी सफलता का समय है। आपके बाहुबल, आपके पुरुषार्थ से ही काम बनेंगे। मेहनत से पीछे न हटें, सफलता मिलेगी।
महीने का उत्तरार्ध, पूर्वार्ध से ज्यादा अच्छा साबित होगा। 15 सितंबर को वृहस्पति वक्री चाल से चतुर्थ भाव में आ जाएंगे और वहां से वह शनि के साथ दशम भाव को देखेंगे। इससे नौकरीपेशा लोगों के लिए परिस्थितियां ज्यादा अनुकूल हो जाएंगी। कामकाज में मन लगेगा। मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कारोबार-व्यापार करने वालों के लिए आय के स्रोत बने रहेंगे। उनके लिए महीने का पूर्वार्ध, उत्तरार्ध की तुलना में ज्यादा अच्छा रहेगा। यदि विदेशी स्रोत से आय होती है तो उत्तरार्ध में कुछ परेशानियां आ सकती हैं। अपने काम को तयशुदा समय पर पूरा करने का प्रयास करें, अन्यथा कुछ परेशानी हो सकती है।
आर्थिक
आर्थिक दृष्टिकोण से सितंबर का महीना अनुकूल रहने की उम्मीद की जा सकती है। सूर्य और मंगल आय के भाव एकादश में स्थित हैं और वृहस्पति की एकादश पर दृष्टि है। इससे आमदनी में वृद्धि होगी। धनागमन के स्रोत खुलेंगे और लाभ की स्थिति बनी रहेगी। आप अपनी मेहनत अपने प्रयास के बदौलत आय के नए स्रोत खड़े करने में सक्षम होंगे। शासन-सत्ता का सहयोग मिलेगा। यदि आपका व्यापार सरकारी क्षेत्र से जुड़ा है, तो उसके लिए पूर्वार्ध विशेषकर लाभदायक रहेगा। वृहस्पति की दृष्टि होने से आपके काम सही मार्ग से पूरे होंगे। आपको किसी गलत रास्ते को अपनाने की जरूरत नहीं होगी। सूर्य और मंगल आपको इसके लिए उकसा सकते हैं। आप इसका ध्यान रखें, क्योंकि जब काम ऐसे ही बन सकता है तो बेवजह की चीजों को क्या मतलब।
बुध और शुक्र व्यय के भाव द्वादश में स्थित हैं। इससे आपके खर्चों में भी अधिकता रहेगी। दिखावे की चीजों के लिए खर्च करने की प्रवृत्ति रहेगी। इसको लेकर सावधान रहें। लेकिन सितंबर के पहले सप्ताह में ही शुक्र राशि परिवर्तन करके प्रथम भाव में आ जाएंगे। इससे विलासिता पर खर्च करने की प्रवृत्ति में कमी आएगी। 22 सितंबर को बुध भी प्रथम भाव में आ जाएंगे, इससे खर्चों में और कमी आने की संभावना तो है, लेकिन उत्तरार्ध में सूर्य और मंगल आपके आय के भाव को त्यागकर खर्च के भाव द्वादश में पहुंच जाएंगे। इससे आमदनी में गिरावट हो सकती है। खर्चों की अधिकता हो सकती है। किसी के साथ वाद-विवाद के कारण कोई दंड या जुर्माना भरना पड़ सकता है। सतर्क रहें।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बात की जाए, तो सितंबर का महीना मिश्रित फल देने वाला रहेगा। पूर्वार्ध अपेक्षाकृत अच्छा रहेगा। उत्तरार्ध में सूर्य और मंगल तथा बुध तीनों द्वादश भाव में होंगे। जहां से वे रोग के भाव छठे भाव को देख रहे होंगे। इसके साथ ही वक्री वृहस्पति और शनि चतुर्थ भाव में होंगे। अष्टम भाव में राहु बैठे हैं। इससे कुल मिलाकर आपके स्वास्थ्य के लिहाज से परेशानी की बात हो सकती है। हालांकि शुक्र अपनी राशि में बैठे होंगे, इससे कुछ बचाव होगा। वृहस्पति की पंचम दृष्टि अष्टम भाव पर रहेगी, तो राहु का प्रकोप भी शांत रहेगा। इसलिए स्वास्थ्य समस्याएं कुछ आएंगी, लेकिन बहुत अधिक परेशानी वाली नहीं होंगी। पित्त या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। एसिडिटी, गैस, अपच आदि की परेशानी रह सकती है। खानपान का ध्यान रखें। संतुलित जीवनचर्या बनाए रखना आवश्यक है।
प्रेम व वैवाहिक
प्रेम संबंधों के लिहाज से सितंबर का महीना खट्टे-मीठे दोंनों तरह के अनुभवों से भरा रह सकता है। पंचम भाव में वृहस्पति विराजमान हैं। यह तो प्रेमभाव के लिए बहुत अच्छा माना जाएगा, लेकिन सूर्य मंगल की दृष्टि भी पंचम पर है। वृहस्पति के प्रभाव से प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। एक दूसरे के प्रति सामंजस्य रहेगा। आपसी तालमेल भी बना रहेगा, लेकिन सूर्य-मंगल विवाद को उकसाएंगे। बेवजह की और मामूली बात पर कहासुनी हो सकती है।
पर वृहस्पति के प्रभाव से आप अपने बुद्धि-विवेक से किसी भी तरह की अनबन या मतभेदों को बहुत सहजता के साथ सुलझा लेने में सफल रहेंगे। आपको थोड़ा सा सावधान रहने की जररूत 15 सितंबर के बाद होगी, क्योंकि वृहस्पति राशि परिवर्तन कर लेंगे। हालांकि मंगल और सूर्य का भी राशि परिवर्तन होगा। मंगल पहले सप्ताह में और सूर्य उत्तरार्ध में राशि परिवर्तन करेंगे। पंचम पर से उनका प्रभाव भी कम होगा, पर दो उग्र ग्रह आपको आक्रोशित करके रंग में भंग डाल सकते हैं। इसलिए थोड़ा संयमित रहें। यदि प्रेम संबंधों को विवाह में बदलने की इच्छा रखते हैं, तो उत्तरार्ध इसके लिए उत्तम समय है।
विवाहित जातकों के लिए महीने की शुरुआत अच्छी रहेगी। जीवनसाथी के साथ सहयोग सामंजस्य बेहतर बना रहेगा। जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। उत्तरार्ध में दाम्पत्य जीवन में कुछ समस्याएं आ सकती हैं। किसी बात को लेकर एक दूसरे के प्रति अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है। आपसी क्लेश हो सकता है। मन को शांत रखें और टकराव से बचें। जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है। इसको लेकर भी सावधान रहने की जरूरत है। उपचार आदि को लेकर लापरवाही न करें।
पारिवारिक
पारिवारिक सुख के भाव चतुर्थ भाव में शनि विराजमान हैं। इससे आप पारिवारिक जीवन को लेकर संजीदा रहेंगे। अपनी जिम्मेदारियों का अहसास भी रहेगा। काम में व्यस्तता के चलते घर-परिवार से दूर भी जाना पड़ सकता है। परिवार को पूरा समय न दे पाने के कारण परिजनों को कुछ शिकायत रह सकती है।
फिर भी कुल मिलाकर पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद है। दूसरे भाव में केतु की उपस्थिति है। इससे किसी बाहरी व्यक्ति के प्रभाव में कुटुंब में कुछ मतभेद या तनातनी हो सकती है। इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी तरह के मतभेद को मनभेद में न परिवर्तित होने दें। आपसी बातचीत से समस्याओं को सुलझाएं और आप इसमें सफल भी होंगे। भाई-बहनों के साथ सामंजस्य बनाने के आपके प्रयास सफल होंगे। भाई-बहनों से लाभ भी हो सकता है। परिवारजनों के साथ मेल-मिलाप का भी अवसर मिलेगा। माताजी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय
1 -प्रतिदिन भगवान विष्णु की उपासना करें और हो सके तो श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।
2- ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें, मंदिर में दर्शन-पूजन को जाएं।
3- बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
4- घी का दीपक जला कर दुर्गा चालीसा का पाठ करें ।

यह राशिफल आपकी चंद्र राशि पर आधारित है। इसके अलावा व्यक्तिगत भविष्यवाणी जानने के लिए ज्योतिषियों के साथ फ़ोन पर या चैट पर जुड़े।

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