सूर्य ग्रह का 12 भावों में फल लाल किताब के अनुसार
लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह को सबसे प्रभावशाली ग्रह माना गया है। यह सभी ग्रहों का स्वामी कहलाता है। लाल किताब के अनुसार सूर्य का 12 भावों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से पड़ता है। हालाँकि सूर्य ग्रह शांति के लिए लाल किताब के उपाय बहुत ही कारगर होते हैं। वैदिक ज्योतिष से अलग लाल किताब में सूर्य के प्रभाव और इससे संबंधित टोटके बताए गए हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि कुंडली के 12 भाव में लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह का क्या प्रभाव पड़ता है और इसके क्या उपाय हैं। नीचे प्रत्येक प्रभाव भाव पर सूर्य का प्रभाव और उससे संबंधित उपाय दिए गए हैं:
लाल किताब में सूर्य ग्रह का महत्व
जिस प्रकार वैदिक ज्योतिष में सूर्य को एक प्रमुख ग्रह माना गया है उसी प्रकार लाल किताब में भी सूर्य को
उतना ही महत्व दिया गया है। पुराणों में सूर्य को देवता कहा गया है जो समस्त संसार की आत्मा है। पौराणिक
ग्रंथों के अनुसार, सूर्य महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा
जाता है और यह सिंह राशि का स्वामी है।
मेष इसकी उच्च राशि है जबकि तुला राशि
में यह नीच भाव में माना जाता है। वहीं चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र ग्रह हैं। जबकि शुक्र और शनि
इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं। सूर्य के शुभ फल पाने तथा इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए बेल की जड़,
माणिक्य रत्न अथवा
एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने विधि ज्योतिष में बतायी गई है।
सूर्य अपने मित्र ग्रहों के साथ होता है तो यह जातकों को शुभ फल देता है। जबकि शत्रु ग्रहों के साथ इसके फल अच्छे नहीं होते हैं। ऐसा कहते हैं कि सूर्य के समीप आने पर किसी भी ग्रह का प्रभाव शून्य हो जाता है, इसलिए कई बार ऐसा होता है कि सू्र्य के प्रभाव में आने के कारण संबंधित ग्रह अपनी प्रकृति के अनुसार परिणाम नही दे पाते हैं। सूर्य गोचर के दौरान क़रीब एक महीने में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस कारण संपूर्ण राशि चक्र को पूरा करने में सूर्य 12 माह अर्थात एक वर्ष लगाता है। यह अन्य ग्रहों की तरह वक्री नहीं होता है।
लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह के कारकत्व
सूर्य को जातक की कुंडली में सम्मान, सफलता, प्रगति एवं सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में उच्च सेवा का कारक माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मा तथा पिता का कारक भी कहा गया है। सूर्य सभी ग्रहों का राजा होता है अर्थात यह नेतृत्व का प्रतीक है। पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूर्य ही है। इसलिए सूर्य को ऊर्जा का भी कारक माना जाता है। इसके अलावा सूर्य ग्रह आत्मा का कारक होता है। मनुष्य के शरीर में सूर्य उसके हृदय को दर्शाता है। साथ ही यह पुरुषों की दायीं आँख जबकि महिलाओं की बायीं आँख का प्रतिनिधित्व करता है। पीड़ित सूर्य के कारण जातकों को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। अतः यह लो ब्लड प्रेशर, चेहरे पर मुहांसे, तेज़ बुखार, टाइफाइड, मिर्गी एवं पित्त, हृदय या हड्डी से संबंधित रोगों का कारक है।
लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह का संबंध
सूर्य ग्रह का संबंध भगवान विष्णु जी है। शास्त्रों में ऐसा वर्णित है कि सूर्य ग्रह भगवान विष्णु जी का प्रतीक हैं जो कि रथ पर सवार हैं। लाल किताब में सूर्य ग्रह का संबंध तांबा, तांबे से संबंधित वस्तुएँ, काली कपिला गाय, इकलौता पुत्र, सख़्त राजा, बहादुर, नीतिवान, क्षत्रिय, राजपूत, माणिक पत्थर, तेज फल, गेहूँ, बाजरा, शिलाजीत, भूरी भैंस आदि से है।
लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह के प्रभाव
यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य बली हो तो जातक को इसके सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। वहीं यदि कुंडली में सूर्य पीड़ित हो तो जातक को इसके नकारात्मक प्रभाव झेलने पड़ते हैं। जैसा कि हम ऊपर बता चुके हैं कि सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में बली होगा जिसके कारण जातकों को अच्छे फल प्राप्त होंगे। वहीं सूर्य अपनी नीच राशि तुला में होगा तो जातक को अशुभ फल मिलेंगे। इसके अतिरिक्त मित्र ग्रहों (चंद्रमा, मंगल, गुरु) के साथ सूर्य शक्तिशाली होता है। अतः यह स्थिति जातकों के लिए शुभ होती है। जबकि शत्रु ग्रहों के साथ होने पर सूर्य जातकों के लिए हानिकारक हो जाता है। आइए जानते हैं किस प्रकार से सूर्य के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव क्या हैं:
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सकारात्मक प्रभाव - जिस जातक की कुंडली में सूर्य उच्च में होता है तो वह जातक स्वयं के बल पर कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति की राह में जितनी रुकावटें आती हैं वह उन रुकावटों को अवसरों परिवर्तन कर आगे बढ़ता है और उसके शत्रुओं का नाश होता है। सूर्य का सकारात्मक प्रभाव जातकों को समाज में मान-सम्मान दिलाता है। इसके साथ ही सरकारी क्षेत्र में जातक उच्च पद की प्राप्ति करता है। इसके अलावा सूर्य के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति समाज का नेतृत्व करता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जातक सदैव ऊर्जावान बना रहता है और उसके साहस में वृद्धि होती है। सूर्य का सकारात्मक प्रभाव जातकों की आभा को तेजवान बनाता है।
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नकारात्मक प्रभाव - सूर्य ग्रह का नकारात्मक प्रभाव जातक को अहंकारी बनाता है। जातक अपने से संबंधित चीज़ों को लेकर घमंडी हो जाता है। इसके साथ सूर्य का नकारात्मक प्रभाव जातक को विश्वासहीन, ईर्ष्यालु, क्रोधी, महत्वाकांक्षी, आत्म केंद्रित, क्रोधी आदि बनाता है। वहीं पीड़ित सूर्य का प्रभाव पिताजी से संबंधों को ख़राब करता है। इस दौरान छोटी-छोटी बातों को लेकर पिताजी से झगड़ा अथवा उनसे मतभेद बना रहता है। अगर इसी को पिता के नज़रिए से देखें तो पीड़ित सूर्य के कारण पिता के संबंध पुत्र से ठीक नहीं रहते हैं। पीड़ित सूर्य का प्रभाव जातकों के वैवाहिक जीवन पर भी नकारात्मक असर डालता है।
लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह शांति के टोटके/उपाय
ज्योतिष में लाल किताब के उपाय को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अतः लाल किताब में सूर्य ग्रह शांति के टोटके जातकों के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। ये उपाय बहुत सरल होते हैं। अतः इन्हें कोई भी व्यक्ति आसानी से स्वयं कर सकता है। सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब के उपाय करने से जातकों को सूर्य के सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब के उपाय निम्नलिखित हैंः
- पति-पत्नी में से किसी एक को गुड़ से परहेज करना चाहिए
- मुफ्त की चीज़ न लें।
- माँ का आशीर्वाद सदैव लें और चावल-दूध का दान करें।
- अंधे व्यक्ति की सहायता करें।<
- दूसरों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करें।
लाल किताब के उपाय ज्योतिष विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं। अतः ज्योतिष में इस पुस्तक को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उम्मीद है कि सूर्य ग्रह से संबंधित लाल किताब में दी गई यह जानकारी आपके कार्य को सिद्ध करने में सफल होगी।
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