Personalized
Horoscope

Coronavirus: stay at home Leave your home if it's necessary. It will help stop the spread of novel coronavirus & COVID-19

  • AstroSage Child Report Banner
  • AstroSage Brihat Horoscope
  • Ask A Question
  • Raj Yoga Report
  • Career Guidance

12 ज्योतिर्लिंग: शिव को समर्पित हिन्दू आस्था के प्रमुख धार्मिक केन्द्र

12 ज्योतिर्लिंग, हिन्दू आस्था के बड़े केन्द्र हैं, जो समूचे भारत में फैले हुए हैं। जहाँ उत्तर में केदारनाथ (उत्तराखंड) है, तो दक्षिण में रामेश्वरम (तमिलनाडु) है। ऐसे ही पूर्व में वैद्यनाथ (झारखंड) है, तो पश्चिम में नागेश्वर (गुजरात) ज्योतिर्लिंग है। सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का संबंध महाकाल शिव जी से है। हिन्दू मान्यता के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्तों के समस्त प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। उनके जन्म-जन्मांतर के सारे पाप मिट जाते हैं और दर्शनार्थी शिवजी के कृपा पात्र बन जाते हैं। हिन्दू धर्म के पवित्र स्थलों में 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा भगवान शिव से किसी न किसी रूप में जुड़ी हुई है। संस्कृत में 12 ज्योतिर्लिंग के महत्त्व को बताती एक स्तुति भी है, जिसे द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति के नाम से जाना जाता है, जो इस प्रकार है -

12 ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥1॥

परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥

वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं घृष्णेशं च शिवालये ॥3॥

एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥

॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति संपूर्णम्‌ ॥

जानिए कहाँ स्थित हैं प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंग

क्र. सं. ज्योतिर्लिंग स्थान
1. सोमनाथ सौराष्ट्र क्षेत्र, गुजरात
2. मल्लिकार्जुन श्रीशैल, आंध्र प्रदेश
3. महाकालेश्वर उज्जैन, मध्य प्रदेश
4. ओंकारेश्वर खंडवा, मध्य प्रदेश
5. केदारनाथ रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
6. भीमाशंकर पुणे, महाराष्ट्र
7. काशी विश्वनाथ वाराणसी, उत्तर प्रदेश
8. त्र्यम्बकेश्वर नासिक, महाराष्ट्र
9. वैद्यनाथ देवघर, झारखंड
10. नागेश्वर द्वारका, गुजरात
11. रामेश्वरम रामेश्वरम, तमिलनाडु
12. घृष्णेश्वर औरंगाबाद, महाराष्ट्र

1. सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर, हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्र देव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।

सोमनाथ मंदिर पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि धार्मिक कर्म-कांडों के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहाँ श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बडी भीड़ लगती है। इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

2. मल्लिकार्जुन

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित है। इस ज्योर्तिलिंग को दक्षिण का कैलाश कहा जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथोें में इस ज्योतिर्लिंग की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।

साथ ही साथ दर्शन करने वाले के सारे पाप मिट जाते हैं और उसे अनंत सुखों की प्राप्ति होती है। दक्षिणी मंदिरो की तरह यह एक पुराना मंदिर है। यह एक ऊंचे पत्थर से निर्मित चारदीवारी के मध्य में स्थित है। जिस पर हाथी-घोड़ों की कलाकृतियाँ बनी हई हैं। परकोटे मे चारों ओर द्धार हैं, जिनपर गोपुर बने हैं।

3. महाकालेश्वर

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ पर कुंभ मेले का आयोजन भी होता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का एक विशेष महत्व है। कहा जाता है कि जो महाकाल का भक्त है, उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। महाकाल के बारे में तो यह भी कहा जाता है कि यह पृथ्वी का एक मात्र मान्य शिवलिंग है। महाकाल की महिमा का वर्णन इस प्रकार से भी किया गया है -

आकाशे तारकं लिंगं पाताले हाटकेश्वरम् ।
भूलोके च महाकालो लिंड्गत्रय नमोस्तु ते ॥

इसका तात्पर्य यह है कि आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग तथा पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है। यहाँ प्रति बारह वर्ष में सिंहस्थ मेला आयोजित होता है। सिंहस्थ कुम्भ मेले के बारे में यह कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन के पश्चात देवता अमृत कलश को दानवों से बचाने के लिए वहाँ से पलायन कर रहे थे, तब उनके हाथों में पकड़े अमृत कलश से अमृत की बूँद धरती पर जहाँ-जहाँ भी गिरी थी, वो स्थान पवित्र तीर्थ बन गए। उन्हीं स्थानों में से एक उज्जैन है।

4. ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ओंकारेश्वर या ॐकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। पुराणों में वायुपुराण और शिवपुराण में ओंकारेश्वर क्षेत्र के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इसी मंदिर में शिव के परम भक्त कुबेर ने तपस्या की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुबेर के स्नान के लिए शिवजी ने अपनी जटा से कावेरी नदी उत्पन्न की थी। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग ॐ के आकार में है इसीलिए इसे ओंकारेश्वर या ॐकारेश्वर कहा जाता है। माना जाता है कि यहीं ॐ शब्द की उत्पत्ति भगवान बह्मा के मुख से हुई थी।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जहां शिव भगवान शयन करने आते हैं। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक शिव भक्त यहां विशेष रुप से भगवान शिव के शयन दर्शन करने आते हैं। मान्यता यह भी है कि भगवान शिव के साथ यहां माता पार्वती भी रहती हैं और वो शिवजी के साथ चौसर (पासे) खेलती हैं। शायद यही वजह है कि शयन आरती के बाद ज्योतिर्लिंग के पास चौसर की बिसात सजाई जाती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गर्भग्रह में शयन की आरती के बाद कोई भी नहीं आता लेकिन सुबह पांसे उल्टे मिलते हैं।

5. केदारनाथ

केदारनाथ मंदिर, हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित है। भगवान शिव का यह दुर्लभ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जलवायु के कारण केदारनाथ मंदिर के कपाट अप्रैल माह में खुलते हैं और नवंबर माह में मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ यह मंदिर अपने आप में अद्भुत है। चूंकि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम भी है। मान्यता ये है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ धाम की यात्रा करता है। उसे इस यात्रा का फल नहीं मिलता है।

6. भीमाशंकर

महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 110 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग। 12 प्रमुख ज्योतिर्लिगों में भीमाशंकर का स्थान छठा है। यह ज्योतिर्लिंग मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शंकर ने कुंभकरण के पुत्र भीमेश्वर का वध किया था। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति को समस्त दुखों से छुटकारा मिल जाता है। यहीं से भीमा नदी भी निकलती है।

7. काशी विश्वनाथ

काशी विश्वनाथ मंदिर शिव जी के सभी 12 ज्योर्तिर्लिंगों में से एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी ज़िले में स्थित है। इसे विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। काशी विश्वनाथ हिन्दू आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र है। वाराणसी गंगा नदी के तट पर स्थित विश्व का सबसे प्राचीन नगर है। यहाँ स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद जैसे महापुरुषों ने किया है।

रामचरित मानस की रचना करने वाले तुलसी दास का भी आगमन भगवान शिव के इस मंदिर में हो चुका है। शिवरात्रि के समय इस मंदिर में लाखों श्रद्धालु शिव के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1780 में महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत के द्वारा 1853 में एक हज़ार किलो ग्राम सोने से इस मंदिर को बनवाया था।

8. त्र्यम्बकेश्वर

त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह मंदिर पूर्णतः भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर महाराष्ट्र के त्र्यम्बक गांव में स्थित है, जो नासिक शहर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। त्र्यम्बकेश्वर मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योति लिंग में से है तथा 12 ज्योतिर्लिंगों में से त्र्यम्बकेश्वर को आठवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर पवित्र गोदावरी नदी के निकट है। त्र्यम्बकेश्वर मंदिर तीन पहाड़ियों के बीच स्थित है, जिसमें ब्रह्मगिरी, निलागिरि और कालगिरी शामिल हैं। मंदिर की एक विशेषता यह है कि इस मंदिर में भगवन शिव, विष्णु और ब्रह्मा जी का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन लिंगम (शिव के एक प्रतिष्ठित रूप) हैं।

9. वैद्यनाथ

हिन्दू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का बड़ा महत्व है। इन सभी से शिव की रोचक कथाएं जुड़ी हुई हैं। देवघर के वैद्यनाथ धाम में स्थापित 'कामना लिंग' भी रावण की भक्ति का प्रतीक है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र वैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है। इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं कि भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए इस शिवलिंग को 'कामना लिंग' भी कहते हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों के लिए कहा जाता है कि जहां-जहां महादेव साक्षत प्रकट हुए वहां इनकी स्थापना हुई। इसी तरह पुराणों में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भी कथा है जो लंकापति रावण से जुड़ी है।

10. नागेश्वर

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका में स्थित है। मान्यता है कि सावन मास में इस प्राचीन नागेश्वर शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंगों की एक साथ पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। मंदिर में इन अद्भुत शिवलिंगों के दर्शन व पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्घालु आते हैं। सावन में विशेष रूप से सोमवार को खासी भीड़ रहती है।

भगवान शिव के निर्देशानुसार ही इस शिवलिंग का नाम ‘नागेश्वर ज्योतिर्लिंग’ पड़ा। माना जाता है कि ‘नागेश्वर ज्योतिर्लिंग’ के दर्शन करने के बाद जो मनुष्य उसकी उत्पत्ति और माहात्म्य सम्बन्धी कथा को सुनता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है तथा सम्पूर्ण भौतिक और आध्यात्मिक सुखों को प्राप्त करता है।

11. रामेश्वरम

हिंदू धर्म में तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिग एक विशेष स्थान रखता है। यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उत्तर में जितना महत्व काशी का है, उतना ही महत्व दक्षिण में रामेश्वरम का भी है, जो सनातन धर्म के चार धामों में से एक है। कहा जाता है कि रामेश्वरम ज्योतिर्लिग की विधिपूर्वक आराधना करने से मनुष्य ब्रह्महत्या जैसे महापाप से भी मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु ज्योतिर्लिग पर गंगाजल चढ़ाता है, वह साक्षात जीवन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। इसकी स्थापना स्वयं भगवन श्री राम ने की थी।

12. घृष्णेश्वर

महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लगभग 29 कि.मी. की दूर पर वेरुल नामक गांव में घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में आखिरी माना जाता है। कई ग्रंथों और पुराणों में उल्लेख है कि घुश्मेश्वर महादेव के दर्शन कर लेने से मनुष्य को जीवन का हर सुख मिलता है। इस ज्योतिर्लिंग को घृष्णेश्वर भी कहा जाता है। बौद्ध भिक्षुओं के द्वारा एलोरा की गुफाएँ इसी मंदिर के निकट हैं। इस मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।

हम आशा करते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंग पर लिखा यह लेख आपके ज्ञानवर्धन में सहायक होगा और आपको अच्छा लगा होगा। एस्ट्रोसेज से जुड़े रहने के लिए आपका धन्यवाद !

Astrological services for accurate answers and better feature

33% off

Dhruv Astro Software - 1 Year

Dhruv Astro Software

'Dhruv Astro Software' brings you the most advanced astrology software features, delivered from Cloud.

Brihat Horoscope
What will you get in 250+ pages Colored Brihat Horoscope.
Finance
Are money matters a reason for the dark-circles under your eyes?
Ask A Question
Is there any question or problem lingering.
Career / Job
Worried about your career? don't know what is.
AstroSage Year Book
AstroSage Yearbook is a channel to fulfill your dreams and destiny.
Career Counselling
The CogniAstro Career Counselling Report is the most comprehensive report available on this topic.

Astrological remedies to get rid of your problems

Red Coral / Moonga
(3 Carat)

Ward off evil spirits and strengthen Mars.

Gemstones
Buy Genuine Gemstones at Best Prices.
Yantras
Energised Yantras for You.
Rudraksha
Original Rudraksha to Bless Your Way.
Feng Shui
Bring Good Luck to your Place with Feng Shui.
Mala
Praise the Lord with Divine Energies of Mala.
Jadi (Tree Roots)
Keep Your Place Holy with Jadi.

Buy Brihat Horoscope

250+ pages @ Rs. 750/-

Big horoscope

AstroSage on MobileAll Mobile Apps

AstroSage TVSubscribe

Buy Gemstones

Best quality gemstones with assurance of AstroSage.com

Buy Yantras

Take advantage of Yantra with assurance of AstroSage.com

Buy Feng Shui

Bring Good Luck to your Place with Feng Shui.from AstroSage.com

Buy Rudraksh

Best quality Rudraksh with assurance of AstroSage.com

Reports